नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन जैसे पाकिस्तान की आदत बन चुकी है। इसके पीछे ज्यादातर मामलों में उसका मकसद चुपके से आतंकवादियों को भारतीय सीमा में घुसाने का प्रयास रहता है। छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी सेना अक्सर भारतीय चौकियों पर उकसावे के लिए गोलीबारी करती है और उसके बीच अपने यहां प्रशिक्षित दहशतगर्दों को भारतीय सीमा में घुसा देती है। पर अब तो वह बेवजह नागरिक ठिकानों पर हमले करने से भी बाज नहीं आती। रविवार को कुपवाड़ा के ऐसे ठिकानों पर पाकिस्तान ने गोले दागे, जहां भारतीय चौकी भी नहीं है। उसमें तीन नागरिक मारे गए। इस पर भारत सरकार ने स्वाभाविक ही पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। मगर जैसी कि पाकिस्तान की पुरानी आदत है, वह पलटवार करते हुए भारत को दोषी ठहराने का प्रयास करता ही है। उसने भी इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के प्रभारी को तलब कर कहा कि भारतीय सेना ने गोलीबारी कर उसके एक नागरिक को मार गिराया है। हालांकि उसके इस आरोप का कोई प्रमाण नहीं है।
पाकिस्तानी सेना की तरफ से होने वाली गोलीबारी के अलावा इन दिनों आतंकवादी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। किश्तवाड़ में सुरक्षाकर्मियों पर हमला इसका ताजा उदाहरण है। इस हमले में एक सुरक्षा अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। सब जानते हैं कि घाटी में आतंकी गतिविधियां तभी बढ़ती हैं, जब उन्हें पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी की शह मिलती है। जबसे कश्मीर से विशेष दर्जा खत्म हुआ है, पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ गई है।
हताशा में हमला